Gold Card Visa : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अवैध तरीके से घुस आए अग्रवासियों को वापस उनके देश भेज रहे हैं और इसके लिए उन्होंने मुहिम चला रखी है. दूसरी तरफ ट्रंप अमीरों के लिए एक ऑफर लेकर आए हैं जिसके तहत वे मोटी रकम खर्च करके अमेरिका की नागरिकता हासिल करने के लिए पात्र हो सकते हैं. आइये जानते हैं कि क्या है ये ऑफर (Gold Card Visa) और इससे भारतीयों पर क्या असर होगा?
निवेश और नौकरी बढ़ाने पर जोर
ट्रंप ने बुधवार को गोल्ड कार्ड प्लान का एलान किया. उन्होंने कहा कि 50 लाख डॉलर की फीस देकर अप्रवासी अमेरिका में रहने का परमिट हासिल कर सकते हैं. यह प्लान मौजूदा 35 वर्ष पुराने ईबी-5 वीजा कार्यक्रम की जगह लेगा. ईवी वीजा कार्यक्रम के तहत कोई भी व्यक्ति अमेरिका में 10 लाख डालर का निवेश करके वहां रहने का परमिट हासिल कर सकता है.
ईबी-5 से कितना अलग है Gold Card Visa
दोनों तरह के वीजा में बहुत बड़ा अंतर है. मौजूदा ईवी-5 कार्यक्रम के तहत, विदेशी निवेशकों को अमेरिका की कंपनियों में 8 से 10 लाख डॉलर के बीच निवेश करना पड़ता है और कम से कम 10 नई नौकरियों का सृजन करना पड़ता है. इसके अलावा ग्रीन कार्ड के लिए 5-7 साल तक इंतजार भी करना पड़ता है. विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए 1990 में शुरू किए गए इस कार्यक्रम पर पिछले कई सालों से दुरुपयोग और धोखाधड़ी के आरोप लगे हैं. अब गोल्ड कार्ड वीजा प्लान की फीस 5 गुना बढ़ाकर 50 लाख डालर तय की गई है. बड़ी लागत की वजह से मध्य वर्ग के निवेशकों के लिए इस प्लान का फायदा उठा पाना मुश्किल होगा.
भारतीयों पर क्या असर होगा
50 लाख डॉलर की लागत का मतलब है कि सिर्फ भारत के बेहद अमीर और बड़े कारोबारी ही अमेरिका में बसने के लिए इस आसान रास्ते का खर्च उठा सकते हैं. इससे उन कुशल पेशेवरों की परेशानी बढ़ सकती है जो पहले से ही ग्रीन कार्ड के लिए लंबे इंतजार के दौर से गुजर रहे हैं. कुछ मामलों में तो यह इंतजार दशकों तक का है. इसके अलावा ईवी-5 के तहत आवेदन करने वाले लोन ले सकते हैं या पैसा जुटा सकते हैं, जबकि गोल्ड कार्ड वीजा (Gold Card Visa) के लिए पूरा भुगतान नकद करना होगा. इसकी वजह से यह भारतीयों के एक बड़े हिस्से की पहुंच से बाहर हो जाता है. वर्तमान में भारतीय पेशेवरों के लिए एच-1बी वर्क वीजा अमेरिका जाने के लिए सबसे पसंदीदा रास्ता है. एच-1बी वीजा वाले भारतीय भी गोल्ड कार्ड के लिए आवेदन कर सकते हैं, बशर्ते वे 50 लाख डॉलर का भुगतान करने की क्षमता रखते हो.
क्या है Gold Card Visa
गोल्ड कार्ड वीजा लोगों के लिए अमेरिकी नागरिकता का रास्ता खोलेगा. यह ग्रीन कार्ड की सुविधाएं देगा. इसकी कीमत करीब 50 लाख डॉलर (लगभग 44 करोड़ रुपये) है. इसका मतलब कि अगर किसी के पास इतनी रकम है, तभी वो अमेरिका का स्थानी निवासी हो सकता है.
क्या असर होगा इसका
भारत से हर साल हजारों लोग ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करते हैं. इसमें बैकलॉग के कारण कुछ को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ जाता है. गोल्ड कार्ड से अमीर भारतीयों के लिए रास्ता खुलेगा, लेकिन मिडिल क्लास के रास्ता बंद होगा.
बदलाव की जरूरत क्यों
राष्ट्रपति ट्रंप ने ईबी-5 प्रोग्राम को गलत और फर्जी बताया. इस वीजा प्रोग्राम से धोखाधड़ी रुकेगी और नौकरशाही पर भी लगाम लगेगी. वहीं नए वीजा प्रोग्राम से देश में निवेश भी बढ़ेगा. अगले 2 हफ्ते में इसके बदलने की संभावना है.
आखिर इसकी जगह ऑप्शन क्या
आम लोग एच-1बी, ईबी-1, ईबी-2 या ईबी-3 वीजा के जरिए अमेरिका में बसने की कोशिश कर सकते हैं. हालांकि, इसकी प्रक्रिया लंबी और मुश्किल है।
किसके लिए यह सुविधा
एच-1बी, ईबी-2 या ईबी-3 वीजा वाले भारतीय भी गोल्ड कार्ड ले सकेंगे. शर्त यही है कि इसके लिए लगभग 44 करोड़ रुपये देने होंगे. माना जा रहा है कि कंपनियां अपने कुशल और योग्य कर्मचारियों को आगे बढ़ाएंगी.
क्या इसकी कोई तय समय सीमा भी होगी
नहीं, ट्रंप ने कहा कि वे 10 लाख से 1 करोड़ तक गोल्ड कार्ड बेच सकते हैं. इसमें भी ईबी-5 की तरह कोई संख्या सीमा नहीं होगी, क्योंकि यह पूरी तरह से अमेरिका के लिए रेवेन्यू स्कीम की तरह काम करेगा.
क्या बिना संसद की मंजूरी के लागू होगा प्रावधान
ट्रंप का कहना है कि उन्हें कांग्रेस (संसद) की मंजूरी की जरूरत नहीं है. हालांकि, विशेषज्ञ इससे सहमत नहीं हैं. अगर इसके खिलाफ मुकदमे दर्ज हुए या राजनीतिक विरोध हुआ तो इसे लागू करने में देरी हो सकती है.
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