Personal Loan for Travel: एक दशक पहले तक पर्सनल लोन का मतलब शादी, घर की मरम्मत या बच्चों की पढ़ाई जैसी जरूरतों को पूरा करना माना जाता था. लेकिन 2024-25 के आंकड़े इस सोच को पूरी तरह बदलते दिख रहे हैं. ताजा सर्वे के मुताबिक, इस वित्तीय वर्ष में पर्सनल लोन लेने वालों में 27 फीसदी लोगों ने इसे सिर्फ घूमने-फिरने (Personal Loan for Travel) के लिए लिया. यह आंकड़ा 10 साल पहले की तुलना में करीब 10 गुना ज्यादा है.
वर्तमान में 24 फीसदी लोगों ने घर की मरम्मत, 11 फीसदी ने क्रेडिट कार्ड का बकाया चुकाने, 9.6 फीसदी ने इलाज, 6.01 फीसदी ने शिक्षा और सिर्फ 5.4 फीसदी ने शादी के लिए पर्सनल लोन लिया. वहीं, आरबीआई और प्रमुख वित्तीय कंपनियों के मुताबिक 2015-16 में शादी के लिए करीब 25 फीसदी और घर की मरम्मत के लिए करीब 30 परसेंट पर्सनल लोन (personal loan for travel) लिया जाता था. उस समय घूमने-फिरने पर खर्च के लिए लोन का हिस्सा 3 फीसदी से भी कम था.
रिवेंज ट्रैवल ने बदली तस्वीर
Personal Loan for Travel
2017 से 2019 के बीच लो-कॉस्ट एयरलाइंस, ऑनलाइन ट्रैवल बुकिंग और “अभी घूमो-बाद में चुकाओ” स्कीमों ने ट्रैवल लोन का हिस्सा 8-10 फीसदी तक पहुंचा दिया. लेकिन कोविड-19 के दौरान 2020-21 में अंतरराष्ट्रीय यात्रा लगभग ठप हो गई और यह आंकड़ा गिरकर 2 फीसदी के आसपास आ गया. 2022 के बाद ‘रिवेंज ट्रैवल’ ट्रेंड ने फिर से तेजी पकड़ ली और 2024-25 में यह आंकड़ा रिकॉर्ड 27 फीसदी तक पहुंच गया.
विदेश यात्राओं में 72% उछाल
पर्यटन मंत्रालय और DGCA के आंकड़े बताते हैं कि 2014 में 1.8 करोड़ भारतीय विदेश गए थे, जो 2019 में बढ़कर 2.75 करोड़ हो गए. कोविड-19 के कारण 2020-21 में इसमें 80 फीसदी की गिरावट आई, लेकिन 2023 में यह महामारी-पूर्व स्तर के 90% तक लौट आया. 2024 में रिकॉर्ड 3.01 करोड़ भारतीय विदेश यात्रा पर गए, जो 2014 की तुलना में 72% अधिक है.
थाईलैंड, सिंगापुर और दुबई सबसे पसंदीदा
2013-23 के बीच भारतीयों ने सबसे ज्यादा थाईलैंड, दुबई, सिंगापुर, मलेशिया, इंडोनेशिया और मालदीव की यात्रा की. इसके बाद स्विट्जरलैंड, फ्रांस और इटली जैसे यूरोपीय देशों का रुख किया. इसकी वजह कम उड़ान समय, आसान वीजा प्रक्रिया, बेहतरीन पर्यटन सुविधाएं और सोशल मीडिया पर इन डेस्टिनेशंस की लोकप्रियता है.
खर्च रक्षा बजट के बराबर
पर्यटन और एविएशन इंडस्ट्री के आकलन के मुताबिक 2014 में विदेश यात्रा पर प्रति व्यक्ति औसत खर्च 85,000-95,000 रुपये था. यह 2019 में 1.25 लाख और 2024 में 1.75-1.9 लाख रुपये तक पहुंच गया. इस हिसाब से 2024 में भारतीयों ने विदेश यात्राओं पर 5.26-5.72 लाख करोड़ रुपये खर्च किए. यह भारत के 2024-25 के रक्षा बजट (6.21 लाख करोड़) का 85-92% है और पाकिस्तान के पूरे रक्षा बजट से भी ज्यादा है.
EMI पैकेज से बढ़ी रफ्तार
भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) से जुड़े पर्यटन विश्लेषक डॉ. आर.के. मेहरा के मुताबिक, यह आंकड़े बताते हैं कि भारतीय मिडिल क्लास अब अनुभव-आधारित खपत की ओर बढ़ रहा है. डिजिटल पर्सनल लोन की आसान उपलब्धता और EMI-बेस्ड ट्रैवल पैकेज ने इस ट्रेंड को और मजबूत किया है. यह न सिर्फ पर्यटन उद्योग के लिए सुनहरा अवसर है, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था में बढ़ते लाइफस्टाइल खर्च का भी संकेत है.
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